हमारा अप्पू घर.. हम सबका अप्पू घर.. मेरी नानी तो इसे मेरा अप्पू कह कर पूकारती थी। वो दिन याद है कि में जब मैं पहली बार नानी के साथ अप्पू घर गया था। अब वो नहीं है... मेरी नानी.. और अप्पू घर भी..... नानी की बहुत याद आती है... और अप्पू घर भी बहुत याद आएगा... जब पूरा परिवार एक साथ वहां पर जाता था झूले झुलता था। खाना भी घर से ही बनाकर ले जाते थे। औऱ खूब मजे करते थे। लेकिन अब अप्पू घर नहीं रहा। देश का पहला अम्यूजमेंट पार्क। रविवार शाम से बंद हो जाएगा। इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का आखिरी फैसला मंगलवार को आना है। अप्पू घर के मैनेजमेंट ने इसे इससे पहले ही बंद करने की घोषणा कर दी है। गौरतलब है कि प्रगति मैदान और मेट्रो स्टेशन के बीच स्थित अप्पू घर की जगह पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के चैंबर और ऑडिटोरियम आदि बनाए जाने हैं। इसी वजह से अप्पू घर की जमीन का लैंड यूज बदला गया और इस जमीन को सुप्रीम कोर्ट को अलॉट किया गया। अब इस जगह पर न्याय की बड़ी बड़ी बातें होंगी... किस को न्याय मिलेगा किस को नहीं ये तो आने वाला समय बताएंगे। लेकिन ये बात तो है कि वकीलों की चांदी होने वाली है। अब इस जगह पर न्याय की गुहार लगा जाएगी। पहले यहां पर मां बाप बच्चों के साथ आते थे... लेकिन अब नहीं..
अलविदा अप्पू घर.. अलविदा अप्पू घर..
अप्पू घर तुझे सलाम.... नमस्ते इंडिया
शनिवार, 16 फ़रवरी 2008
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